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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

बुधवार, 3 दिसंबर 2008

कृष्ण की आवश्यकता है.

कृष्ण जो नेत्रत्व को मोहमुक्त कराकर उसे स्वधर्म का भान कराये, उसके अंतर्मन मैं इच्छा व संकल्प शक्ति को जगाये और कहे-- नपुंसक मत बन पार्थ , दुर्वलता त्याग , उठ खडा हो , युद्ध कर।

नेताओं पर टिप्पणियाँ -मुंबई हमले के बाद

नेताओं पर टिप्पणियाँ उनकी बुराई खूब की जारहीं हैं ; जनता, मीडिया व सभी लोग ज़रा अपने गरेवान मैं भी झाँक कर देखें वे स्वयं कहाँ खड़े हैं । नेता जनता से ही आते हैं .यदि वे नाकारा हैं तो जनता स्वयं ही दोषी है। जनता स्वयं क्यों अपने छोटे छोटे कार्यों के लिए नेताओं को तरजीह देती है। उन्हें बिगाड़ने वाले ,नाकारा बनाने वाले हम ही हैं। दूसरों को दोष देना कितना आसान है? आज हम सब , सारी मानवता ,मानवता से गिर गयी है, हर व्यक्ति सिर्फ़ स्वयं के बारे मैं ही सोचता है तो नेता कैसे अपवाद रह सकता है? जो नेता उचित बात कहता है ,कैसे मीडिया के स्वयंभू विद्वान् ( जो शायद एजूकेशन तथा ज्ञान की सबसे निम्न स्तर से आते हैं। ) उनसे अदालत की तरह हाँ या ना कहलवाने की कोशिश करते हैं। रोजाना टी.वीपर देखिये । जनता सोचे और समझे ।