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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

शुक्रवार, 9 जनवरी 2009

अपन- तुपन --कविता काव्य- दूत से.

मेरे रूठकर चले आनेपर
पीछे -पीछे आकर ,
'चलो अपन- तुपन खेलेंगे '
माँ के सामने ,यह कहकर
हाथ पकड़कर ,
आंखों मैं आंसू भरकर
तुम मना ही लेतीं थी , मुझे
इस अमोघ अस्त्र से ,
बार- बार ,हर बार
सारा क्रोध ,गिले- शिकवे
काफूर होजाते थे ,
और बाहों मैं बाहें डाले ,
फ़िर चलदेते थे ,खेलने
हम-तुम ,
अपन- तुपन।

Fault lies in me --poem

Today in the society there,
I found a chaos everywhere;
Cruelty, injustice, fraud & greed,
Bluff, intolerance in our callous breed.

Reasons of this inflammed state,
Remedy & cure or perilous fate;
With reasonability and depth, I see,
I found the fault lies in me.

I file the contract with beautiful lies,
And services of low quqlity I supply;
To stand in a queue, why I feel shy,
To get work done ,backdoor tricks I try.

Crime corruption loots and thefts,
I turn my back on wicked acts;
Justice, sacrifice, truthfuldeeds,
Petriotism,loyalty,are obsolete.

Expertised in politics in every field,
For personal benefits undue pessures I yield;
Why the cycle of bribery I further extend,
I receive single way & pay at many ends.

People may keep fighting and quarrelling everyday,
Infighting and fault finding,not help anyway,
Neither you are at fault nor SHYAM nor he,
I pray hang me, fault lies in Me.