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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

बुधवार, 8 अप्रैल 2009

सही जानकारी -जिम्मेदार चुनाव -दैनिक हि.

मृणाल पांडे का कहना है किबाहुबलियों की चुनाव मैं यह स्थिति युवा मतदाता क्यों बर्दास्त करें ?,उनमें इस स्थिति का तोड़ पैदा करने की इच्छा है ।हिन्दुस्तान व खबरिया चेनल आई बी एन -७ का अनुभव है --कैसा व किस प्रकार का व किन स्तरके युवाओं पर है यह अनुभव ?-- क्योंकि यही युवा लोग -पैसे की दौड़ मैं आगे हैं ,येनकेनप्रकारेणअपना काम निकलवाने के लिए कुछ भी ,कुछ भी करने को तैयार होजाते हैं ;पिछली पीडी से भी अधिक तेजी से । अर्थात वही'ढाकके तीन पात' कि सामने वाला ही सुधरे ,हम नहीं ।सिर्फ़ जानकारी ,तर्क, एकजुटता से यह नहीं होगा , जागते रहो -होशियार -जैसे लुभावने नारों से भी नहीं । हम अपनी आवश्यकताएं कम करें ,प्रलोभनों से दूर रहें । आवश्यकता व मजबूरी मै भी बाहुबलियों ,धन ,अनुचित साधनों का सहारा न लें , यदि कोई उचित उम्मीदवार नहीं है तो वोट भी न दें sवयम को सुधारें ,न की अन्यको।