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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

रविवार, 19 अप्रैल 2009

बूढे सपनों मैं कैद जवान देश .-मृणाल पांडे

क्या यह एक जवान देश है ?, नया देश है ? इतिहास को पाश्चात्य नज़र से देखने वाले , व स्वतंत्रता के बाद ही भारत का इतिहास समझ ने वाले यह भूल करते ही रहते हैं। दुनिया के सबसे पुराने देश के बारे मैं।
क्यों हम भूल जाते हैं , कि-राजा युवा होता था , मंत्री सदैव बूढा ,अनुभवी , तपातपाया। यदि आप मंत्रियों को ही राजा समझते हैं तो जो होना है हो ,क्या करें । यदि प्रजातंत्र के अनुसार -प्रजा राजा है तो मंत्रीगण कौन व कैसे हों आप स्वयं ही सोचिये ।
युवा शक्ति ,जोश व साहस ,उमंग को कर्म करना होता है , अनुभव व ज्ञान के परामर्श से।

खबर और आत्मा की आवाज .मीडिया

वर्तिका नंदा ने ब्रिटिश मीडिया मैं गिरावट की बात कही है । भारत की रिपोर्टिंग की भी चिंता जताई है।" सबसे पहले हम ", "हमारा चेनल सबसे आगे " "पत्रकारों को अपनी नौकरी करने पर भी सम्मान --(यदि पत्रकार ने कोई समाज सेवा ,उत्कृष्ट साहित्य सेवा आदि किया है तो उल्लेख के साथ उसी क्षेत्र का सम्मान हो सकता है.--पत्रकारिता अनिवार्य कर्म है , सेवा नहीं ), पीतपत्रकारिता , सर्वश्रेष्ठ चंनल आदि मारा मारी हटे तो गिरावट समाप्त हो क्योंकि इससे धनार्जन व कदाचरण का स्थान कम होगा। पत्रकारों के लिए अनुशाशन संहिता की अत्यावश्यकता है। ख़बर नवीसों को समाचार पत्रों मैस्वयं अपने आलेख नहीं छापने देना चाहिए । उच्चकोटि के विद्वान ही यह कार्य करें ।

अंकल सभी धर्म एक हैं.

अब बताइये बच्चों के काल्पनिक मुख से क्या-क्या कहलाया जा रहा है ! बच्चों को क्या सिक्षा दी जा रही है ? आख़िर बच्चों को राजनीती ( वरुण घटनाक्रम -जो विवादित है ) मैं लाने की , घसीटने की आवश्यकता ही क्या है सिखाना ही है तो यह सिखाएं कि-वस्तुतः सभी धर्म एक नहीं धर्म ही सिर्फ़ एक ही है -मानवता धर्म । अब लोग बच्चों के सिरपर भी रख कर अपनी रोटी सकने लगे हैं। जो सभी धर्मों की बात करता है वह धर्म का अर्थ न समझ कर -मज़हब , सम्प्रदाय की बात कहरहा होता है।