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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

शनिवार, 5 सितंबर 2009

विघ्न विनाशक गणेश स्वयं किसे भजते हैं ---

समस्त संसार के प्रथम पूज्य ,विघ्न विनाशक गणेश स्वयं किसको भजते हैं? यों तो लौकिक रूप में वे अपने माता -पिता, शिव-पार्वती की पूजा करते हैं; वे गणनायक,पूजन योग्य उपासकों द्वारा भी पूजित हैं। वे सगुण -ब्रह्म पञ्च देवों में एक हैं, तथा भगवद-शक्त्याविष्ट आधिकारिक देव हैं। परन्तु उनकी सारी महिमा भी आदि-पुरूष ,पर-ब्रह्म की कृपा पर ही आधारित है। ब्रह्म-संहिता में सृष्टि आरम्भ के लिए ब्रह्माजी प्रार्थना करते हैं,--
" यत्पादपल्लवम युगं विनिधाय कुम्भ्द्वान्द्वे प्रणामसमये गणाधिराज |
विघ्नान विहंतुमल्मस्य जगत्त्र्यस्य गोविन्द्मादिपुरुष तमहं भजामि॥ "

-----तीनों लोकों के समस्त विघ्नों का विनाश करने हेतुशक्ति प्राप्त करने के लिए , जिनके चरण कमलों को श्री गणेश अपने मस्तक के दोनों कुम्भों पर धारण करते हैं , उन आदि-पुरूष गोविन्द का में भजन करता हूँ॥