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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

गुरुवार, 21 अक्तूबर 2010

एक काव्य गोष्ठी ऐसी भेी---डा श्याम गुप्त ....

<------डा श्याम गुप्त के आवास पर गुरुवासरीय गोष्ठी।
लखनऊ यों तो गोष्ठियों का नगर है, काव्यमय नगर है जिसके बारे में मैंने अपने एक 'श्याम सवैया' में कहा है कि---"--जो कवि हों तौ बसों लखनऊ , हर्षाये गीत-अगीत विधा सी ---"
----लखनऊ में एक काव्य गोष्ठी है " गुरुवासरीय काव्य गोष्ठी " यह कोई रजिस्टर्ड / स्थापित जाना माना नाम नहीं है अपितु एक अनौपचारिक गोष्ठी है। गोष्ठी भी कोई बहुप्रचारित सामान्य काव्य-गोष्ठियों की भांति निर्धारित अध्यक्ष -मुख्य-अतिथि आदि ताम झाम वाली नहीं है, नहीं कवि सम्मेलनों बाला झंझट आदि|न कोई सन्चालक होता है । न इस गोष्ठी की कोई समाचार या सूचना व प्रकाशन , पत्र आदि में दिया जाता हैं न प्रचार किया जाता है, न कोई पब्लिक कार्यक्रम, न लोकार्पण आदि। बस कुछ कवि-गण मिलकर बैठ लेते हैं |अपनी अपनी रचनाएँ प्रस्तुत करते हैं जो प्रायः नवीन रचना होती है | सभी कवियों का स्थान बराबर होता है, कोई छोटे -बड़े की औपचारिकता नहीं होती , चाहे कोई नवीन कवि हो या स्थापित या कवि-गुरु। माँ सरस्वती की वन्दना वही कवि करता है जिसके आवास पर गोष्ठी होरही है | विशिष्ट बात यह है कवियों की रचनाओं व प्रकाशित/ अप्रकाशित पुस्तकों आदि की गुणवत्ता , कमियों , शब्द चयन,विषय-भाव, कथ्य, कला सौन्दर्य , अर्थवत्ता, सामाजिक सरोकारों आदि पर खुलकर व्याख्या स्वस्थ समालोचना एवं समाधान परक दृष्टिकोण भी अन्य साथी कवियों द्वारा दिया जाता है
-------इस गोष्ठी की स्थापना के मूल में आलमबाग के मूर्धन्य कविश्री प्रेम चन्द्र सैनी की इच्छा पर श्री( स्व) वीरेन्द्र कुमार अन्शुमाली , अध्यक्ष प्रतिष्ठा संस्था, आलमबाग व श्री ( स्व.)जगत नारायनण पान्डे, एड्वोकेट, मूर्धन्य कवि व विद्वान द्वारा नवगीतकार व वरिष्ठ कवि श्री मधुकर अस्थाना व श्री राम देव लाल ’विभोर’ के सहयोग से की गई । तत्पश्चात कुछ अन्य कवि व साहित्य्कार भी जुडते गये, तभी से लगभग पांच वर्ष से यह गोष्ठी लगातार बिना व्यवधान के चलरही है । इस गोष्ठी की कोई सदस्यता नही है, ७-८ से अधिक सद्स्यों को जोडने का न तो प्रोत्साहन दिया जाता न कोई इच्छा की जाती है। कभी कभी किसी मूर्धन्य कवि-साहित्य्कार को अतिथि के रूप में शामिल करलिया जाता है जिनमें प्रायः साहित्य-भूषण डा रामाश्रय सविता अगीत विधा के संस्थापक डा रंगनाथ मिश्रसत्य प्रमुख हैं। यह गोष्ठी प्रत्येक सप्ताह गुरुवार को किसी भी एक सदस्य के घर पर बारी बारी से अनौपचारिक रूप से होती है।
वर्तमान में इस गोष्ठी से नियमित जुडे हुए कवि व साहित्यकार हैं---श्री राम देव लाल विभोर, मधुकर अस्थाना, डा श्याम गुप्त, श्रीमती सुषमा गुप्ता, प्रेम चन्द्र सैनी ,बसन्त राम दीक्षित,श्रीमती पुष्पा दीक्षित , डा श्रीकृष्ण सिन्ह अखिलेश , डा सूर्य प्रकाश शुक्ला हैं एवं श्री चन्द्र पाल सिंह 'चन्द्र' हैं ।