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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

शुक्रवार, 10 जून 2011

डा श्याम गुप्त के दोहे...

                                                                                    ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...
पानी  सींचें प्रेम का ,चाहें प्रिय फल-फूल |
कटुता बोये क्या मिले, तीखे शूल बबूल ||

सींचे  बिन मुरझा गयी, सदाचार की बेल |
श्याम  कहाँ फूलें फलें ,संस्कार के फूल ||


दायें  हाथ से दान कर, बायां सके न जान |
सबसे  बढकर दान है, गुप्त दान यह मान ||


आत्म शान्ति से जो मिले,अति सुख अति सम्मान |
सो  सुख लक्ष्मी दे नहीं , मिले न अमृत पान ||


कमल जो कीचड में पड़ा, कीचड लगे न सोय |
सत्य  कर्म करता रहे ,विषय लिप्त नहीं होय ||


सज्जन ऐसा जानिये, ज्यों पानी के ढंग |
किसी पात्र में डालिए , ढले उसी के रंग  ||


श्याम किसे मिलते नहीं, व्याधि, दुःख और दोष |
जग सुख दुःख का नाम है,किसको है परितोष ||