ब्लॉग आर्काइव

डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

मेरी फ़ोटो
Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

शुक्रवार, 17 जून 2011

प्रथम पूज्य देवाधिदेव गणेश... .....डा श्याम गुप्त....

                                                                                 ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

अनवर जमाल साहब ने अपनी पोस्ट में लिखा...-----

"" सच्चा गणेश कौन है ? Real Ganesh --- गण + ईश = गणेश
जो गणों का स्वामी है वही गणेश है। यह ईश्वर का एक नाम है। यह संस्कृत का नाम है। क़ुरआन की सबसे आखि़री सूरा (114, 3) में भी अल्लाह को ‘इलाहिन्नास‘ कहा गया है।  इलाह = ईश, नास = गण ,   'इलाहिन्नास'= गणेश.. .....
.हिंदू दार्शनिकों ने इस प्रॉब्लम को हल करने के लिए कल्पना और चित्र आदि का सहारा लिया तो गणेश का रूप कुछ से कुछ बन गया और ....... इस तरह की कल्पनाओं ने लोगों को भ्रम में डाल दिया है और हिंदू और मुसलमानों में दूरी डाल दी है।---.""  -----------

            यह तो अच्छी बात है गणेश का नाम कुरआन में है क्योंकि वह वेदों से बहुत बाद की है .......पर  वास्तव में अनवर साहब गणेश का अर्थ व उनके रूप के भावार्थ  नहीं समझे ... ....ये भारतीय  तत्वज्ञान है कि ब्रह्म या ईश्वर एक होते हुए भी वह विभिन्न रूप से जाना, माना, पहचाना, पूजा, अर्चा जाता है...जाकी रही भावना जैसी ......हिन्दू धर्म-तत्व कोइ एक किताब नहीं कि सभी उसीका पालन करें  आँख बंद करके ......अपितु प्रत्येक देव  व उसका नाम , काम, रूप, भाव स्वयं में एक किताब है .....मानव को उस पर अपनी इच्छा, श्रृद्धा, भाव, कर्मानुसार आँखें खोलकर ...सोच समझकर चलना होता है..........बहुत लिबरल है ये धर्म-व्यवस्था....जीने की व्यवस्था.......

                      .ये तो कक्षा ५ का विद्यार्थी भी जानता है कि  तत्पुरुष समास के अनुसार... गण+ ईश = गणेश ---अब गण कौन है .....जन  गण मन ...अर्थात  राष्ट्र, राज्य आदि---- अर्थात ..गणाध्यक्ष ....अब गणाध्यक्ष कैसा होना चाहिए ...इसी भाव से है गणेश जी का रूप ...उनका एक नाम 'गणपति' भी है | वे देवाधिदेव हैं ....... यदि बहुब्रीहि समास के अनुसार कहें तो.... गणेश ..= गण है ईश जिसका ...अर्थात जो गण अर्थात राष्ट्र...जन गण मन को ही अपना सब कुछ मानता हो.....तो ऐसे व्यक्ति को देव ही कहेंगे औरसी के अनुसार गणेश जी का रूप है  वे देवाधिदेव हैं ऐसे कल्याणकारी  देव को सर्व-प्रथम क्यों न पूजा जाय....|---मुझे लगता है मेरा एक ---बाल गीत  ही गणेश के बारे में समझाने के लिए काफी होगा.....

        गणपति गणेश....

लम्बी सूंड कान पन्खे से, छोटी छोटी आँखें  हैं |
हाथी जैसा सर है जिनका,एकदंत कहलाते हैं ||

मोटा पेट हाथ में मोदक,चूहे की है बनी सवारी |
ओउम कमल औ शंख हाथ में,माथे पर त्रिशूल धारी ||

ये गणेश हैं गणनायक हैं,सर्वप्रथम पूजे जाते |
क्यों हैं एसा वेष बनाए,आओ बच्चो बतलाते ||

तुच्छ जीव है मूषक लेकिन, पहुँच हर जगह है उसकी |
पास रखें ऐसे लोगों को,एसी कुशल नीति जिसकी ||

सूक्ष्म निरीक्षण वाली आँखें, सबकी सुनने वाले कान |
सच को तुरत सूंघ ले एसी, रखते नाक गणेश सुजान ||

बड़े  भेद  और  राज  की बातें, बड़े पेट में  भरी रहें |
शंख घोष है,कमल सी मृदुता,कोमल मन में सजी रहें ||

सबका हो कल्याण,  ॐ से सजे  हस्त से  वर देते |
मोदक का है अर्थ,सभी को प्रिय कहते,प्रिय कर देते ||

अमित भाव-गुण युत ये बच्चो!, रूप अनेकों  सजते |
कभी नृत्यरत,कभी खेलरत,कभी ग्रन्थ भी लिखते||  

 ऐसे  सारे गुण हों  बच्चो! वे ही नायक कहलाते |
हैं  गणेश  देवों के नायक, सर्वप्रथम पूजे जाते ||
                                      --सभी चित्र ..साभार..