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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

गुरुवार, 24 मई 2012

पृथ्वी का संरचनात्मक इतिहास--- क्रमिक श्रृंखला .... डा श्याम गुप्त..

                 


 

          यह आदि-सृष्टि  कैसे हुई, ब्रह्मांड कैसे बना एवं हमारी अपनी पृथ्वी  कैसे बनी व यहां तक का सफ़र कैसे हुआ, ये आदि-प्रश्न सदैव से मानव मन व बुद्धि को निरन्तर मन्थित करते रहे हैं । इस मन्थन के फ़लस्वरूप ही मानव  धर्म, अध्यात्म व विग्यान रूप से सामाजिक उन्नति में सतत प्रगति के मार्ग पर कदम बढाता रहा आधुनिक विग्यान के अनुसार हमारे पृथ्वी ग्रह की विकास-यात्रा क्या रही इस आलेख का मूल विषय है । इस आलेख के द्वारा हम आपको  पृथ्वी की उत्पत्ति, बचपन  से आज तक की क्रमिक एतिहासिक यात्रा पर ले चलते हैं।
      ( सृष्टि व ब्रह्मान्ड रचना पर वैदिक, भारतीय दर्शन, अन्य दर्शनों व आधुनिक विज्ञान  के समन्वित मतों के प्रकाश में इस यात्रा हेतु -- मेरा आलेख ..मेरे ब्लोग …श्याम-स्मृति  the world of my thoughts..., विजानाति-विजानाति-विज्ञान ,  All India bloggers association के ब्लोग ….  एवं  e- magazine…kalkion Hindi  तथा  पुस्तकीय रूप में मेरे महाकाव्य " सृष्टि -ईशत इच्छा या बिगबैंग -एक अनुत्तरित उत्तर " पर पढा जा सकता है  | )
                         हमारी पृथ्वी 
                          पृथ्वी  सूर्य से तीसरा ग्रह  हैपृथ्वी  सौर मंडल  में व्यास, द्रव्यमान और घनत्व  में सबसे बड़ा स्थलीय ग्रह है ।  पृथ्वी के अलावा इसका पृथ्वी ग्रहसंसार ,धरती  और  टेरा के रूप में भी उल्लेख होता है।
                                  पृथ्वी मानव सहित लाखों प्रजातियों  का घर है, पृथ्वी ही ब्रह्मांड में एकमात्र वह स्थान है जो  जीवन  अस्तित्व के लिए जाना जाता हैवैज्ञानिक खोजें संकेत देती  हैं कि इस ग्रह का गठन ४.५४ अरब वर्ष (४.५ बिलियन ईयर्स) पहले और उसकी सतह पर जीवन लगभग एक अरब वर्ष पहले प्रकट हुआतब से, पृथ्वी के  जीवमंडल  (मानव सहित ) ने   ग्रह पर पर्यावरण और अन्य अजैवकीय ( जड़ ,प्राकृतिक  ) परिस्थितियों को बदल दिया है ताकि वायुजीवी जीवों  (एरोबिक लाइफ ) के प्रसारण, साथ ही साथ ओजोन परत ( ओजोन लेयर)  के छरण  को रोका जा सके जो पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र   ( मेग्नेटिक -फील्ड )   के साथ हानिकारक विकिरण को रोक कर जमीन पर जीवन की अनुमति देता है।
                
                    लगभग  4.6 बिलियन वर्ष पूर्व पृथ्वी ग्रह का निर्माण हुआ पृथ्वी की आयु ब्रह्माण्ड की आयु की लगभग एक-तिहाई है आज की स्थिति तक पहंचने के दौरान पृथ्वी में व्यापक भूगर्भीय  तथा जैविक  परिवर्तन हुए | संक्षिप्त में इस ऐतिहासिक का खंड को पांच  भागों  में  वर्णित किया जा  सकता है -----
   भाग १-- सौर मंडल की उत्पत्ति -४.५४ बिलियन वर्ष पूर्व ---, सूर्य ,पृथ्वी व अन्य ग्रहों की उत्पत्ति
पृथ्वी का केन्द्र व प्रथम वातावरण  की उत्पत्ति, पानी व चन्द्रमा की उत्पत्ति  | महासागरों  व पृथ्वी पर द्वितीय वातावरण की उत्पत्ति| महाद्वीपों  का बनना |
भाग २ - जीवन की उत्पत्तिअणु का प्रथम प्रतिलिपिकार व प्राकृतिक चयन का प्रारम्भ, जैविक सूप , प्रारंभिक कोशिकाएं, बहुकोशीय जीवन का विकास, ऑक्सीजन क्रान्ति व ओक्सीजन या  प्रकाश-संश्लेषण– पृथ्वी का तृतीय वातावरण ....ओजोन परत का निर्माण ....
भाग ३ - जीवन का विकास--- कोशिकीय सहजीविता , माइटोकोंड्रिया का विकास, क्लोरोप्लास्ट , पेरोक्सीजोम्स , कोशिका का नाभिक ...प्रथम कोशिकीय श्रम-विभाजन –वनस्पति व जंतु कोशिका ...विभिन्न जैव कालोनियों का निर्माण व सामूहिक विलोपन व म्यूटेशन......
भाग ४ -केम्ब्रियन-विस्फोट ....जीवन की तीब्र गति से वृद्धि ...प्रथम कशेरुकी जीव ...मछली का सागर में उद्भव ..संधिपाद प्राणी....चतुष्पाद प्राणी का अवतरण.....जल-स्थल( उभय) चर......पक्षियों व सरीसृपों की उत्पत्ति ....पृथ्वी पर जीवन....हिम-युग...विलोपन....डायनासोर्स.....स्तनधारियों का उद्भव....आवृत्त-बीजी-पुष्पों का विकास...
भाग ५- मानव का उद्भव व विकासभाषा, सभ्यता, संस्कृति, धर्म, अध्यात्म व विज्ञान .....

 
   सन्दर्भ--- Refrences….
1-The age of earth….Donlrymps G S, Newman williyam.et el..US geological society 1997.
2.-evidence for Ancient bombardment on earth…by Robert rock
3-Evolution of fossils & plants…taylor et el.
4-oigin of earth & moon..NASA .by taylor
5-Did life come from another world?...wanflesh david etc..scientific American press.
6-cosmic evolution…tufts university..by cherssan eric…
7-Trends in ecology & evolution…Xiao S, lafflame S…
8-A natural history of first 4 billions of life on earth., newyork, nature & earth..by forggy and richmand…
9- First step on land….mac newtan, Robert B and jeniffar M..
10-The mass Extinction  …science Aug 05…
11- पृथ्वी का इतिहास एवं चन्द्रमा की उत्पत्ति व विशाल संघात अवधारणा…..विकीपीडिया 
                ---क्रमश: भाग १-- सौर मंडल की उत्पत्ति...अगली पोस्ट में ...