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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

रविवार, 12 अगस्त 2012

यह बिजिनेस मेनेजमेंट है.... डा श्याम गुप्त ....

                                       ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

                              आज  कल घर घर में एम् बी ए  के  स्कूल खुल रहे हैं और हर व्यक्ति मेनेजर बनने का ख्वाव देखता है .... सफाई प्रवंधन मेनेजर ही क्यों न हो .... मेनेजमेंट का ज़माना है ...छोले-पकौड़ी या कपडे , जूते, कुर्सी-मेज बेचने वाला हो या घर-घर पर  साबुन-सर्फ़ ...सब मेनेजर हैं | यह मेनेजमेंट है क्या .... किसी भी भांति से अपना सामान बेचना......देखिये ...चित्र में...
१---कीमत --४००००/-( और बेईमानी की इंतिहा है कीमत ..३९९९९ /- लिखना ..क्या हम इतने मूर्ख हैं ?)  जिसकी कीमत १०००० /- से अधिक् नहीं होगी ....फ्री में १४००० के आइटम ..जिनकी कीमत ४००० /- से अधिक नहीं होगी .....अर्थात १४००० का माल ४००००/- में |
२-- कीमत --३२०००/-( ३१९९९/-/)  जो १००००/- से अधिक की नहीं है ...फ्री में २१०००/- का आइटम जो ६००० /- से अधिक का नहीं होगा ....अर्थात ....आप  ही सोचें ...क्यों  बिजेंनेस-में वारे-न्यारे होते हैं.... कहाँ  से , कैसे कालाधन पैदा होता है ......यह बाजारवाद है...बाज़ार का धर्म....

--- क्या सिखा रहे हैं हम अपने नौनिहालों को ..शुरू से ही .झूठ, बेईमानी , टेक्स चोरी ..स्कूल-कालेजों से ही ...वे बड़े होकर क्या करेंगे .....
---- ऐसे  समाज, सरकार, वर्ग  से हम क्या आशा करें .....और क्यों करें ....
.................................................................. मस्त राम मस्ती में , आग लगे बस्ती  में ...........


झूठा  विज्ञापन करें , सबसे अच्छा माल |
देकर गिफ्ट, इनाम बस, ग्राहक करें हलाल |

झूठ काम की लूट है, लूट सके तो लूट |
तू पीछे रह जाय क्यों, सभी पड़े हैं टूट |

तेल-पाउडर बेचते, झूठ बोल इतरायं |
बड़े  महानायक बने, मिलें लोग हरषायं |

साबुन क्रीम औ तेल को, बेच रहीं इतराय |
झूठे  विज्ञापन करें , हीरोइन कहलायं |