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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी तेरह पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह), अगीत त्रयी ( अगीत विधा के तीन महारथी ), तुम तुम और तुम ( श्रृगार व प्रेम गीत संग्रह ), ईशोपनिषद का काव्यभावानुवाद .. my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी ---फेसबुक -डाश्याम गुप्त

गुरुवार, 23 अगस्त 2012

मेरी खुशियों का राज ...ड़ा श्याम गुप्त....

                                         ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...

                      काफी  पुराने समय की बात है ..सुना, देखा ,पढ़ा करते थे ...कभी कभी आजकल भी दिख जाते हैं ... गली-कूचों में  कुछ लोग... जो अपने को हकीम भी बताया करते थे ... बेचा करते थे.... मर्दाना ताकत की दवा...मुसली,शिलाजीत... सांडा का तेल, जिसे उसी समय किसी तेल में  छिपकली टाइप के जानवर को तल कर बनाया भी जाता था ... अखवारों आदि में विज्ञापन भी आया करते थे | उन्हें पढ़े-लिखे लोगों, वैज्ञानिक जगत के विज्ञान-विज्ञान  चिल्लाने वाले लोगों में  हिकारत की दृष्टि से देखा जाता था |



        आज के अखबारों को उठाकर जब देखते हैं तो ...हाईपावर, जापानी तेल, खुशी का होर्स-पावर , स्टे-ओन, मरदाना पावर ..आदि के विज्ञापन भरे रहते हैं |
    क्या हम ७०-८० साल में भी वहीं के वहीं हैं ....अथवा पुरातन ..को अंग्रेज़ी, पाश्चात्य या नयी बोतलों में ढाल कर वही माल बेचा जा रहा है |