ब्लॉग आर्काइव

डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

मेरी फ़ोटो
Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

रविवार, 6 जनवरी 2013

डा श्याम गुप्त की ग़ज़ल......

                                 ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...



होशियार रहना.... गज़ल....

इस शहर् में आगये होशियार रहना।
यह शहर है यार कुछ होशियार रहना।

इस शहर में घूमते हैं हर तरफ ही,
मौत के साए ज़रा होशियार रहना।

घूमते हैं खट-खटाते अर्गलायें,
खोलना मत द्वार बस होशियार रहना ।

एक दर्ज़न श्वान थे और चार चौकीदार,
होगया है क़त्ल यूं होशियार रहना।

अब न बागों में चहल कदमी को जाना,
होरहा व्यभिचार सब होशियार रहना।

सज-संवर के अब न जाना साथ उनके,
खींच लेते हार , तुम होशियार रहना।

चोर की करने शिकायत आप थाने जारहे,
पीचुके सब चाय अब होशियार रहना।

 क्षत-विक्षत जो लाश चौराहे पर मिली,
काम आदमखोर सा ,होशियार रहना।

वह नहीं था बाघ आदमखोर यारो,
आदमी था श्याम' सब होशियार रहना॥