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डा श्याम गुप्त का ब्लोग...

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Lucknow, UP, India
एक चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक जो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान व उसकी संस्कृति-सभ्यता के पुनुरुत्थान व समुत्थान को समर्पित है व हिन्दी एवम हिन्दी साहित्य की शुद्धता, सरलता, जन-सम्प्रेषणीयता के साथ कविता को जन-जन के निकट व जन को कविता के निकट लाने को ध्येयबद्ध है क्योंकि साहित्य ही व्यक्ति, समाज, देश राष्ट्र को तथा मानवता को सही राह दिखाने में समर्थ है, आज विश्व के समस्त द्वन्द्वों का मूल कारण मनुष्य का साहित्य से दूर होजाना ही है.... मेरी दस पुस्तकें प्रकाशित हैं... काव्य-दूत,काव्य-मुक्तामृत,;काव्य-निर्झरिणी, सृष्टि ( on creation of earth, life and god),प्रेम-महाकाव्य ,on various forms of love as whole. शूर्पणखा काव्य उपन्यास, इन्द्रधनुष उपन्यास एवं अगीत साहित्य दर्पण (-अगीत विधा का छंद-विधान ), ब्रज बांसुरी ( ब्रज भाषा काव्य संग्रह), कुछ शायरी की बात होजाए ( ग़ज़ल, नज़्म, कतए , रुबाई, शेर का संग्रह) my blogs-- 1.the world of my thoughts श्याम स्मृति... 2.drsbg.wordpres.com, 3.साहित्य श्याम 4.विजानाति-विजानाति-विज्ञान ५ हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान ६ अगीतायन ७ छिद्रान्वेषी

रविवार, 28 अप्रैल 2013

ग़ज़ल ..अंदाज़े बयाँ ज़िंदगी का .....डा श्याम गुप्त

                              

                         ....कर्म की बाती,ज्ञान का घृत हो,प्रीति के दीप जलाओ...



           अंदाज़े-वयां ज़िंदगी का....

जरूरी नहीं ज़िंदगी को घुट-घुट के जिया जाए |
चलो आज ज़िंदगी का अंदाज़े-वयां लिया जाए |

खुशी पाते हैं जो अपनी शर्तों पे जिया करते हैं ..
शर्त  यही  हो  कि  सदा परमार्थ  हित  जिया जाए ..|

यूं तो पीने के कितने बहाने  हैं  ज़माने में,
लुत्फ़ है जब जाम से जाम टकरा के पिया जाए |

मरते हैं हज़ारों लोग दुनिया में यूं तो लेकिन,
मौत वही यारो जब देश पे कुर्वां  हुआ जाए |

जन्म लेते हैं, औ जीते हैं प्रतिदिन जाने कितने,
जीना वही जब राष्ट्र का सिर गर्वोन्नत किया जाए |

लिखी जाती हैं कितनी किताबें, कविता-कहानियां,
साहित्य वही  कुछ सामाजिक सरोकार दिया जाए |

ग़ज़ल कह तो रहा है हर खासो-आम यहाँ, लेकिन 
ग़ज़ल वही  जब अंदाज़े-वयां श्याम का जिया जाए |